रविवार, 29 नवंबर 2009

मेरे ज़ज्बात


जाने क्या बात है तुममे अपने जैसे लगते हो,
हो बिल्कुल अनजाने लेकिन दिल को सच्चे लगते हो,
काश! तुम मेरे पास जो होते,
बातें करता जी भर कर,
तुम मन भर स्नेह लुटाता,
अश्क न आने देता तुम्हारी आंखों पर,
एसा नही की मुझे कमी थी इस दुनिया में किसी चीज की,
लेकिन तुमको पाकर लगता है मुक़म्मल है जिंदगी।

एक दुल्हन के लिए

आज शाम शहनाइयों के आलम में,
जब माहोल महकता होगा,
सुर्ख जोड़े में होगी तुम जो,
जन्नत में जुदां समां होगा,
चेहरे पर तेरे नूर की चादर होगी,
देख तेरे रूप को हूर भी शर्माती होगी,
तेरी खुशियों के समंदर पर तो,
कायनात भी इतराती होगी,
जा रही हो घर किसी का बसाने,
दिल में लाख अरमान लिए,
करता दुआ में उस रब से,
तेरा हमदम सदा तेरे साथ रहे,
बड़ा खुशनसीब है वो आँगन जिसको तेरा इंतज़ार है,
हाँ, उस घर की आबोहवा को भी अब तुझसे प्यार है।

मेरी दास्तान

खुशी तलाश ली मैंने गम के आशियाने में,
अब कोई और क्या देगा मुझे इस ज़माने में,
कोई किसी के लिए इतना बेरहम बने,
जितनी दुनिया बन गई मुझे सताने में,
किसी से कुछ कहा पीता रहा अश्को को,
हदें भी पार की हमने ये गम उठाने में,
जाने क्या खता हुई मुझसे,
सब हस-हस कर आए मुझे रुलाने में,
में सोचता हूँ क्या खता हुई मेरे दिल से,
की कोई साथ नही देता मेरा मुस्कुराने में।

मंगलवार, 20 जनवरी 2009

आसमा से उपर....एक उड़ान की ख़्वाहिश है..!!
जहाँ हो हर क़दम सितारो पर....उस ज़मीन की ख़्वाहिश है..!!
जहाँ पहचान हो लहू की हर एक बूँद की....उस नाम की ख़्वाहिश है..!!
जहाँ खुदा भी आके मुझसे पूछे....."बता, क्या लिखू तेरे मुक्क़दर मे....?
"उस मुकाम की ख़्वाहिश है..!!उस मुकाम की ख़्वाहिश है..!!