आज शाम शहनाइयों के आलम में,
जब माहोल महकता होगा,
सुर्ख जोड़े में होगी तुम जो,
जन्नत में जुदां समां होगा,
चेहरे पर तेरे नूर की चादर होगी,
देख तेरे रूप को हूर भी शर्माती होगी,
तेरी खुशियों के समंदर पर तो,
कायनात भी इतराती होगी,
जा रही हो घर किसी का बसाने,
दिल में लाख अरमान लिए,
करता दुआ में उस रब से,
तेरा हमदम सदा तेरे साथ रहे,
बड़ा खुशनसीब है वो आँगन जिसको तेरा इंतज़ार है,
हाँ, उस घर की आबोहवा को भी अब तुझसे प्यार है।
रविवार, 29 नवंबर 2009
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