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मेरी माँ
कभी वो इठलाती है, कभी नाज़ दिखाती है,
आंसू मेरे गिरते तो पलकों तले उठाती है,
जब भी मैं तनहा होता दोस्त मेरी बन जाती है,
गुस्से में वो मुझसे लड़ती और बहुत सताती है,
पर एक बात सदा मुझको भाती,
प्यार से वो 'पिल्लू' कहकर बुलाती है...
2 टिप्पणियां:
बेहतरीन ब्लाग है, मैटर और साज-सज्जा दोनों मामलों में। keep it up
gud job, keep it up.
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